पॉलीप्रोटिक अम्ल: वे अम्ल जिनमें प्रति अणु एक से अधिक आयनित होने योग्य प्रोटॉन होते हैं। इन्हें पॉलीबेसिक अम्ल भी कहा जाता है।
डाईप्रोटिक अम्ल: वह अम्ल जिसमें प्रति अणु दो आयनित होने योग्य प्रोटॉन होते हैं। इन्हें डाईबेसिक अम्ल भी कहा जाता है।
डाईप्रोटिक अम्ल $(H_2X)$ के लिए सामान्य आयनीकरण:
$H_2X_{(aq)} \rightleftharpoons 2H^+_{(aq)} + X^{2-}_{(aq)}$
आयनीकरण दो चरणों में होता है:
$(i) H_2X + H_2O \rightleftharpoons H_3O^+ + HX^- \quad K_{a1}$
$(ii) HX^- + H_2O \rightleftharpoons H_3O^+ + X^{2-} \quad K_{a2}$
यहाँ,$K_{a1} > K_{a2}$ और कुल वियोजन स्थिरांक $K_a = K_{a1} \times K_{a2}$ होता है।
डाईप्रोटिक अम्ल के उदाहरण: ऑक्सेलिक अम्ल $(H_2C_2O_4)$,सल्फ्यूरिक अम्ल $(H_2SO_4)$,कार्बोनिक अम्ल $(H_2CO_3)$ और सल्फ्यूरस अम्ल $(H_2SO_3)$।
ट्राईप्रोटिक अम्ल के उदाहरण: फॉस्फोरिक अम्ल $(H_3PO_4)$ और साइट्रिक अम्ल।
पॉलीप्रोटिक अम्ल के विलयन में,$H_2A$,$HA^-$,और $A^{2-}$ जैसी विभिन्न अम्लीय प्रजातियों का मिश्रण साम्यावस्था में मौजूद रहता है।